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Luv kush mahadev Temple naranbagar


Luvkush mahadev mandir naranbagar me isthit hai uttrakhand ke chamoli jile me naranbagar xetra me yahan aasthaa ke bemisaal sakti hai
रामायण कालीन महर्षि वाल्मिकी की महान धरा एवं माता सीता के पुत्र लव-कुश का जन्मस्थल यहां हर साल श्रावन महीने के पावन पर्व पर धार्मिक पाठ का आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। सनातन धर्म से जुड़ी धरती : सनातन धर्म की आस्था इस धरती से जुड़ी है रामायण कालीन महर्षि वाल्मिकी आश्रम एवं वैदेही विहार के रूप में माता सीता तथा लव-कुश की यादों को सहेजे यह धरती शांत मन को प्रफुल्लित करने वाली है। यहां शक्तिस्वरूपा मां काली की प्रतिमा सघन वृक्षों एवं पहाड़ों में विराजित है, जहां श्रदालु भोले नाथ के लिंग पर जलाभिषेक एवं अपनी मुरादें पूरी करने हेतू प्रति वर्ष श्रावन व माघ महीने में आते हैं
लव-कुश के जन्म के मौजूद हैं तमाम सबूत ------- अब आश्रम की देखरेख कर रहे पंडित जी कहते हैं, इसी आश्रम में लव-कुश का जन्म हुआ था। इसके तमाम सबूत मौजूद हैं। यहाँ मंदिर में भोलेनाथ का विशाल शिवलिंग भी है एवं वहाँ से कुछ दूरी पर लव का मंदिर व एक विशाल चट्टान के ऊपर वामिकी जी की कुटिया है इसके नीचे की तरफ सीता कुंड कहा जाने वाला स्थान है यहाँ पर एक चट्टान से नीचे आता हुआ एक विशाल झरना है माना जाता है इस स्थान में सीता माता स्नान करती थी
एवं यहाँ पर विशालकाय चट्टान पे अदभुत आकृतियां हैं भक्तजन यहाँ चढ़ावा चढाते हैं कुछ समय पहले इसी चट्टान पर सीता मां के बाल की आकृति थी जो अब लुप्त हो गई हैं यहां रुद्राभिषेक कराने से कटते है सभी संकट - ग्रामीणों की मान्यता है कि लव कुश महादेव मंदिर में यदि रुद्राभिषेक कराया जाए तो रुद्राभिषेक कराने वाले भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।- उसके कष्ट दूर होते हैं और महादेव की विशेष कृपा उस पर बनी रहती है। - यह शिवलिंग काले रंग का है। इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से आत्म शांति का अनुभव प्राप्त होता है। - इस स्थान को पर्यटन विभाग का भी सहयोग मिल रहा है।- मंदिर परिसर में स्थित पंचमुखी शिवलिंग महादेव मंदिर के अलावा मंदिर प्रागंण में ही स्थित लव-कुश जन्म स्थल, लव-कुश पाठशाला और सीता माता सती स्थल को भी जीर्णोद्वार कर संरक्षित किया जा रहा है।
वाल्मिकी कुटिया at luv kush mahadev dungari

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